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Shri Jasanath Ji Images: Guru Jasnath Ji Maharaj (1482-1506) (गुरु जसनाथ जी महाराज), whose real name changed into Jasnath, changed into the founder of Jasnathi Sampradaya . He become from Jyani gotra of Jats from village Katariasar in Bikaner State. His father changed into Hamirji of jyani Jat clan and chieftain of Katariasar. When the Rathor rulers in Bikaner extended the land taxes excessively, human beings became very disillusioned. Jasnath Ji Maharaj regarded at this juncture to put off the problems faced by the human beings. He set up this Sampradaya in samvat 1551 in Churu.

Shri Jasanath Ji Images 2018

The followers of Jasnathi Sampradaya are in large quantity, especially Jats, in Sardarshahar, Nagaur, Panchla (Marwar), Jodhpur, Barmer, Churu, Ganganagar, Bikaner and other places in Rajasthan and additionally many people from Haryana, Punjab and Madhya Pradesh consider in it.

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Are you looking to download Jasanath Ji Maharaj Ki Aarti? Here is full aarti for Jasanath Ji Maharaj. ( सिद्धाचार्य श्री देव जसनाथ जी की आरती )

जय श्री जसनाथा, स्वामी जय श्री जसनाथा ।
बार-बार आदेश, नमन करत माथा ।।
तुम जसनाथ सिद्धेश्वर स्वामी मात तात भ्राता ।
अजय अखंड अगोचर , भक्तन के त्राता ।।
धर्म सुधारण पाप विडारण, भागथली आता ।
अविचल आसन गोरख , गुरु के गुण गाता ।।
परमहंस परिपूर्ण ज्ञानी ,परमोन्नती करता ।
ब्रह्म तपो बल योगी , करमवीर धरता ।।
जाल वृक्ष अति उत्तम सुन्दर , शांत सुखद छाता ।
योग युक्त जसनाथ विराजे , मन मोहन दाता ।।
श्री हांसो जी चंवर दुलावत, नमन करत पाला ।
हरोजी करत आरती गुरु के गुण गाता ।।
भक्त्त लोग सब गावत , जोड़ जुगल हाथा ।
सुवरण थाल आरती ,करत रुपांदे माता ।।
सुर नर मुनि जन जसवंत गावत , ध्यावत नव नाथा ।
सिद्ध चौरासी योगी , जसवंत मन राता ।।
जतमत योगी जगत वियोगी , प्रेम युक्त ध्याता ।
सूर्य ज्योतिमय दिव्य रूप के , शुभ दर्शन पाता ।।

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1. जो कोई जात हुए जसनाथी |
2. उत्तम करणी राखो आछी ||
3. राह चलो धर्म अपना रखो |
4. भूख मरो पण जीव न भखो ||
5. शील स्नान सांवरी सूरत |
6. जोत पाठ परमेश्वर मूरत ||
7. होम जाप अग्नि सुर पूजा |
8. अन्य देव मत मानो दूजा ||
9. ऐंठे मुख से फूंक न दीजो |
10. निकम्मी बात कालमत कीजो ||
11. मुख से राम नाम गुण लीजो |
12. शिव शंकर को ध्यान धरीजो ||
13. कन्या दाम कदे नहीं लीजो |
14. ब्याज वसे वो दूर करीजो ||
15. गुरू की आशा विसवंत बांटो |
16. काया लगे नहीं अग्नि कांटो ||
17. हूको तमाखु पीजे नाहीं |
18. लसन अरि भांग दूर हटाई ||
19. साटिये सोदा वर्जित ताई|
20. बेल बढ़ावन पावे नाहीं ||
21. मृगां वन में रखत कराई |
22. घेटा बकरा थाट सवाई ||
23. दया धर्म सदा ही मन भाई |
24. घर आया सतकार सदाई ||
25. भूरी जटा सिर पर रखीजे |
26. गुरु मंत्र हृदय में धरीजे ||
27. देही भोम समाधी लीजे |
28. दूध नीर नित्य छाण रखीजे ||
29. निंदा कूड़ कटक नहीं कीजे |
30. चोरी जारी पर हर दीजे ||
31. रजश्वाला नारी दूर करीजे |
32. हाथ उसका जल नहीं लीजे ||
33. काला पानी पीजे नाहीं |
34. नाम उसी का लीजे नाहीं||
35. दस दिन सूतक पाले भाई|
36. कुल की काट करीजे नाहीं ||

These are Jasanath Ji ke 36 Rules. I hope you will like these images.

Updated: April 7, 2018 — 3:18 am

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